बाढ़ के कारण बेघर हुए लोगों को आवास दिलाने के लिए प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने रघुवंशी ने कसी कमर
Flood# बुरहानपुर। 22 जुलाई को जिले में बाढ़ ने तबाही मचाई। बाढ़ में मकान बहे। सैकड़ो लोग बेघर हो गए है। इन बेघरों को आवास दिलाने के लिए अब प्रदेश कांग्रेस महासचिव अजयसिंह रघुवंशी ने कमर कस ली है। पीडि़तों को आवास दिलाने के लिए रघुवंशी ने जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रयास तेज कर दिए है। रघुवंशी ने कहा बाढ़ प्रभावितों को बसाना है तो गांवों में सरकारी जमीनें खाली पड़ी है। इसके साथ ही पीएम आवास योजना में कलेक्टर के पास 20 प्रतिशत कोटा भी है। इस 20 प्रतिशत कोटे में बाढ़ प्रभावितों को अजयसिंह रघुवंशी ने बताया पीडि़तों को आवास दिलाने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सबसे पहले पीडि़तों को चिह्नित करें। प्रशासन पीएम आवास का मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाएं। सबसे जरूरी घर है। घर होगा तो पीडि़तों का जीवन पटरी पर लौट सकेगा। इसके लिए मैं शासन, प्रशासन स्तर पर प्रयास कर रहा हूं। जल्द ही पीडि़तों के आवास के लिए काम शुरू करवाया जाएगा। समय रहते लोगों ने बचाई जान 22 जुलाई को जिलेभर में तेज बारिश से नदी, नाले उफान पर आ गए थे। इससे ग्राम फोपनार और जसौंदी में बाढ़ आने के कारण घर बह गए थे। फोपनार में मोहना नदी उफान पार आई थी। इससे फोपनार में नदी ने किनारे छोड़ दिए थे। बाड़ के रौद्र रूप देखकर समय रहते लोग घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान पर आ गए, लेकिन नदी के दोनों किनारों पर बने आवास बाढ़ में बह गई। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। लाखों रुपए का सामान बह गया। अंजनडोह नदी की बाढ़ ने जसौंदी में मचाई तबाही ग्राम जसौंदी में अंजनडोह नदी पर बना तालाब तेज बारिश के कारण कुछ ही देर में लबालब हो गया। ओवरफ्लो होने के कारण बड़ी मात्रा में पानी नदी में आ गया। इससे पानी गांव के डाबर क्षेत्र में घुसा। इस बाढ़ में बहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। कई घर बह गए। सरकारी आवासों में बीता रहे दिन बाढ़ से तबाही के बाद बेघर हुए लोग अब भी सरकारी आवासों में दिन बीता रहे हैं। अनाज, कपड़े तक नहीं है। दान दाताओं ने पीडि़तों को अनाज उपलब्ध करवाया है, लेकिन गृहस्थी बसाने के लिए लोगों को आवास की जरूरत है। नदी किनारों पर करें बांस का रोपण अजय रघुवंशी ने प्रशासन से मांग की है कि जिलेभर में नदियों के किनारों पर बांस के पौधों का रोपण किया जाना चाहिए। इसका वैज्ञानिक तथ्य ये है कि बांस के कारण मिट्टी का कटाव नहीं होता है। बाढ़ आने पर भी बांस की जड़े मिट्टी को जमाए रखती है। इसलिए प्रशासन को बड़े स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है।