बुरहानपुर। सोशल मीडिया का दौर है। वाट्सएप के किसी एक ग्रुप पर एक संदेश कुछ ही देर में लाखों लोगों तक पहुंचन में चंद मिनट लगते हैं, लेकिन युवाओं को दिल में अपनी मन की बात उतारने के लिए पूर्व मंत्री व भाजपा प्रवक्ता अर्चना चिटनीस ने प्रदेश के बुरहानपुर से नवाचार किया है। अर्चना चिटनीस ने अपने हैंड राइटिंग में पत्र लिखा और युवाओं तक पहुंचाई। इस अभियान में कैलाश जाधव ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ ख्ुाद युवाओं का दरवाजा खटखटाया और चिटनीस की लिखी चिट्ठी युवाओं को दी। इस तरह अर्चना चिटनीस द्वारा लिखी अपने नाम की चिट्ठी देखकर युवा भी हैरत में पड़ गए। युवाओं ने यह चिट्ठी पढ़कर चुनाव में मतदान करने का चिटनीस का प्रेरणादायक संदेश पढ़ा। युवाओं ने अर्चना चिटनीस की इस पहल की खूब सराहना की। शनिवार को होटल हाई राइज में अर्चना चिटनीस ने प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया मैंने खुद चिट्ठी लिखी और अब तक 36828 युवाओं तक पहुंचा दी है। 42104 युवाओं के नाम चिट्ठी लिखी है। आठ से दस दिन में शेष युवाओं तक भी चिट्ठी पहुंचेगी। इन युवाओं में वें शामिल हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे। नए मतदाताओं का पता लगाने के लिए मतदाता सूची का सहारा लिया गया। इसमें नए जुड़े मतदाताओं को चिह्नित किया गया। इसके लिए मतदाता सूची का एक-एक पेज कार्यकर्ताओं ने देखा। पन्ने पलटते हुए जो भी 18 वर्ष पूर्ण करने वाला मतदाता पाया गया। उसे पेन से चिह्नित किया गया। चिह्नित करने के बाद एक-एक युवाओं का पता निकाला। चिट्ठी पर उनका नाम लिखकर पते पर पोस्ट किया। प्रदेश में पहला जिला यह नवाचार करने वाला बुरहानपुर प्रदेश का पहला जिला है। इसका उद्देश्य यही है कि नए मतदाताओं को मतदान का महत्व बताकर युवाओं से अधिक से अधिक मतदान करवाना है। इस नवाचार में एक और विशेषता है कि इसमें भाजपा को वोट देने के लिए नहीं कहा गया है। सिर्फ देशहीत में वोट देने का संदेश दिया गया है। महिलाओं के अधिकार में हम सबसे जागरूक अर्चना चिटनीस ने बताया महिलाओं को उनका अधिकार देने में हमारा भारत सबसे जागरूक है। हम अमेरिका को विकसित समझते हैं, लेकिन अमेरिका में 133 साल बाद मतदान का अधिकार मिला है। इसके अलावा और भी ऐसे देश हैं, लेकिन हमने प्राचीन समय से महिलाओं को उनका अधिकार दिया है। भारत में हर किसी को मतदान क अधिकार है, लेकिन कुछ विकसित देशों में ऐसा था कि जो टैक्स चुकाता है सिर्फ वो ही मतदान कर सकता है। भारत में ऐसा नहीं है। अंग्रेज भी महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं देना चाहते थे, लेकिन इस मामले में भारत मिसाल है।